अरे ! उसे क्यों मारा सिर्फ टोपी ही तो पहनी है ,
कैसी चली यह हवा है, जहाँ टोपी पहनना भी गुनाह है ,
उनकी गाड़ी में तो गाय भी नहीं थी ,
फिर भी मार दिया और देशद्रोही करार दिया ।
मारने वाले कौन थे? पुलिस थी ,
या खुद न्यायाधीश आए थे ,
भीड़ थी या ऊपर से खुद यमराज आए थे ,
अरे ! उसे क्यों मारा सिर्फ टोपी ही तो पहनी है ।
टोपी पहनना गुनाह था क्या ?
उन्हें भी बताया था क्या ?
अगर बताते तो वह टोपी पहनते क्या ?
अगर टोपी नहीं होती तो वह जल्लाद उन्हें काटते क्या ?
यह सवाल है या टोपी पर उठा बवाल है ।
कैसे यह नयी छवि बन गयी ,
इंसानो द्वारा ही इंसानियत कुचली गयी ।
याद रखना ,
अब की बार जब टोपी पहनो तो , दो चार बात ही सहनी है ,
अरे ! उसे क्यों मारा सिर्फ टोपी ही तो पहनी है ।
-मिSHRA
-अरुणाभ मिश्रा (शंख)
कैसी चली यह हवा है, जहाँ टोपी पहनना भी गुनाह है ,
उनकी गाड़ी में तो गाय भी नहीं थी ,
फिर भी मार दिया और देशद्रोही करार दिया ।
मारने वाले कौन थे? पुलिस थी ,
या खुद न्यायाधीश आए थे ,
भीड़ थी या ऊपर से खुद यमराज आए थे ,
अरे ! उसे क्यों मारा सिर्फ टोपी ही तो पहनी है ।
टोपी पहनना गुनाह था क्या ?
उन्हें भी बताया था क्या ?
अगर बताते तो वह टोपी पहनते क्या ?
अगर टोपी नहीं होती तो वह जल्लाद उन्हें काटते क्या ?
यह सवाल है या टोपी पर उठा बवाल है ।
कैसे यह नयी छवि बन गयी ,
इंसानो द्वारा ही इंसानियत कुचली गयी ।
याद रखना ,
अब की बार जब टोपी पहनो तो , दो चार बात ही सहनी है ,
अरे ! उसे क्यों मारा सिर्फ टोपी ही तो पहनी है ।
-मिSHRA
-अरुणाभ मिश्रा (शंख)
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